रानी लक्ष्मी बाई
पिता : श्री मोरो पन्त 
जन्म : १९ नवम्बर १८३५, बनारस में.
विवाह हुआ झाँसी के राजा गंगाधर राव से.
१८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी से युद्ध छेड़ने वाली अद्वितीय मिशाल पेश की.
ब्रिटिश सेना से युद्ध करते हुए ग्वालियर के निकट १८ जून १८५८ को मात्र २३ वर्ष की अवस्था में शहीद हो गयीं . तत्कालीन जनरल ह्यूरोज ने कहा था कि मुझे भारतीय लड़को में कोई मर्द दिखा तो वो थी रानी लक्ष्मी बाई. आज भी वो हमारी प्रेरणा श्रोत हैं.
बहादुर शाह जफ़र ( अंतिम मुग़ल सम्राट)
१२ मई १८५७ को बहादुर शाह ने अग्रेंजों के विरुद्ध फरमान जारी किया, किन्तु शीघ्र ही अग्रेंजों ने उनको हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया . विलिअम हडसन ने दिल्ली गेट पर आज जहाँ खुनी दरवाजा स्थित है वहां पुत्रों और एक पुत्र को गोली से उड़ा दिया , बहादुर शाह को रंगून निर्वासित कर दिया, जहाँ ७ नवम्बर १९६२ को उनका देहांत हो गया.
तात्याँ टोपे
तात्या टोपे का जन्म सन 1814 में पूना में हुआ था। तात्या टोपे का वास्तविक नाम- 'रामचंद्र पांडुरंग येवलेकर' था। उनके पिता पांडुरंग अण्णा साहब कहलाते थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के गृह-विभाग का काम देखते थे. बालकाल बिठूर में पेशवा के दत्तक पुत्र नाना साहब और झाँसी की वीरांगन रानी लक्ष्मीबाई के साथ व्यतीत हुआ था। आगे चलकर 1857 में देश की स्वाधीनता के लिए तीनों ने जो आत्मोत्सर्ग किया था वह हमारे स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
सन 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के विस्फोट होने पर तात्या भी समरांगण में कूद गया था। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और नाना साहब के प्रति अंग्रेज़ों ने जो अन्याय किये थे, उनकी उसके हृदय में एक टीस थी। उसने उत्तरी भारत में शिवराजपुर, कानपुर, कालपी और ग्वालियर आदि अनेक स्थानों में अंग्रेज़ों की सेनाओं से कई बार लोहा लिया था। सन् 1857 के स्वातंत्र्य योद्धाओं में वही ऐसा तेजस्वी वीर था जिसने विद्युत गति के समान अपनी गतिविधियों से शत्रु को आश्चर्य में ड़ाल दिया था। वही एकमात्र एसा चमत्कारी स्वतन्त्रता सेनानी था जिसमे पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के सैनिक अभियानों में फिरंगी अंग्रेज़ों के दाँत खट्टे कर दिये थे । आखिर में इनके एक गद्दार मित्र मानसिंह ने तात्या के साथ धोखा करके उसे अंग्रेज़ों को सुपुर्द कर दिया था।१८ अप्रैल १८५९ को अंग्रेज़ों ने उसे फांसी पर लटका दिया था.
वेलु थम्पी
जन्म : ६ मई १७६५ को तमिलनाडु के गाँव कल्कुलम में श्री कुंजन मयेति पिल्लई के घर पैदा हुए. ऐसा मन जाता है कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के विरोध में खड़ा होने वाला यह प्रथम युवक था. अग्रेंजो के विरुद्ध रण छेड़ा और घिर जाने पर स्वयं अपनी तलवार से अपनी गर्दन काट कर शहीद हो गए .
नाना साहब
वास्तविक नाम : धूंधूपंत, जन्म : 1824 में वेणुग्राम निवासी माधवनारायण राव के घर। इनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय के सगोत्र भाई थे। पेशवा ने बालक नानाराव को अपना दत्तक पुत्र स्वीकार किया. । सन् 1857 में वह काल्पी, दिल्ली तथा लखनऊ गए। काल्पी में आपने बिहार के प्रसिद्ध कुँवरसिंह से भेंट की और भावी क्रांति की कल्पना की। जब मेरठ में क्रांति का श्रीगणेश हुआ तो नाना साहब ने बड़ी वीरता और दक्षता से क्रांति की सेनाओं का कभी गुप्त रूप से और कभी प्रकट रूप से नेतृत्व किया। अग्रेजों को खुली चुनौती दी और हार सामने देख बड़ी पटुता से वह से निकल गए और आन्दोलन को गुप्त रूप से चलाते रहे. अंग्रेज सरकार ने नाना साहब को पकड़वाने के निमित्त बड़े बड़े इनाम घोषित किए किंतु वे निष्फल रहे। उनका आखिरी समय अज्ञात है.
मंगल पाण्डेय
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